मेरा मूल घर राजसमंद है...
मार्बल का भंडार,
माइंस और संगमरमर की फेक्ट्रियों का गढ़ !!!
🛑अक्सर इनके गोदामों के बाहर
बेकार मार्बल का ढेर-
ब्लाक,लफर आदि का दिख जाता है...
तकनीकी तौर पर नाकारा माल !!!
🛑इन्हें आते-जाते जब भी देखता हूं ....
माइकल एंजलो की याद आ जाती है !!!
उनकी विदेशी कहानी सुनाऊँ... रोम की ???
सुन भी लो !!!
🔵माइकल एंजलो ....
संगमरमर की एक दुकान के सामने से अक्सर गुजरते थे. एक दिन उन्होंने दुकानदार से पूछा-
"तुमने दुकान के दूसरी तरफ रास्ते के किनारे
एक बड़ा सा संगमरमर का पत्थर
डाल रखा है...
कई बरस से देख रहा हूं.
उसे बेचते क्यों नहीं ???"
🔵दुकानदार ने कहा-
"वह बिकता ही नहीं !!!
पत्थर बेकार है...
मैंने तो आशा ही छोड़ दी है.
कोई चाहे तो मुफ्त में भी ले जाये !!!
ढोने का खर्च भी मैं दे दूंगा.....
तुम पूछने आये हो तो तुम्हीं ले जाओ ना !
झंझट मिटे और जगह खाली हो !!!!
🔵और ....
माइकल एंजलो वह पत्थर ले गया.
कई साल बीतने के बाद...
एक दिन माइकल एंजलो ने
उसी दुकानदार से आकर पूछा-
"मेरे घर चलोगे??
वहां कुछ दिखाने योग्य है !!!"
🔵दोनों घर गये ...
दुकानदार ने देखा जो देखा तो
आंखों से आनंद के आंसू बह निकले !!!
🔵माइकल एंजलो ने उस पत्थर में
जो प्रतिमा गढ़ी थी,
वह थी जीससऔर मरियम की प्रतिमा !!!
जीसस को मरियम ने सूली से उतारा है,
जीसस की लाश को मरियम
अपने हाथों में लिये बैठी हैं ....
अद्भुत अद्वितीय प्रतिमा !!!!
🔵लोग आने लगे,
देखने लगे,,
सराहने लगे...
प्रतिमा की और माइकल एंजलो की
प्रसिद्धि बढ़ने लगी !!!
🔵और फिर ...
कुछ सालों बाद
एक "पागल आदमी" ने इसी प्रतिमा को
हथौड़ा मारकर तोड़ दिया....
🔵जब उससे पूछा गया--
"यह तूने क्या किया ??
इतनी श्रेष्ठ कृति नष्ट कर दी???"
तो उसने कहा-
"जैसे माइकल एंजलो का नाम प्रसिद्ध था,
अब मेरा भी नाम प्रसिद्ध रहेगा..
उसने बनाई, मैंने मिटाई !!!
वह बना सकता था,
मैं बना नहीं सकता,,
लेकिन मिटा तो सकता हूं!!!"
🔵तो रोम की इस कहानी पर
इन्डिया में सोचिये...
कि
🔵किसी देश के निर्माण के लिए
भूमि, सीमा, सेना,
जनता, सरकार, संस्कृति आदि की जरूरत होती है...
मगर इसके साथ-साथ जरूरत होती है-
नायकों की ....हीरोज की भी !!!
🔵किसी देश के इतिहास, धर्म,
राजनीति और ज्ञान के पुरोधा होते हैं ये नायक !!!
ये होते हैं वो जो ....
अगली पीढ़ियों को गौरवान्वित करते हैं,
राष्ट्र की महानता और उच्चता,
उसके आदर्श में आस्था जगाते हैं...
🔵इन हीरोज़ की छवि, उनका जीवन....
अगली पीढ़ी के नये नागरिकों के मन में
मूरत की तरह बस जाती है !!!
और फिर.....
वे हीरोज़, वे नायक
देश के प्रतीक हो जाते हैं,
व्यक्ति नहीं संस्था हो जाते हैं!!!
इनकी मूरत सिर्फ पत्थरों में ही नहीं होती,
करोड़ों-करोड़ों लोगों के दिलों में होती है !!!
🔵इसलिए....इसलिए
गांधी नेहरू व्यक्ति ही नहीं,
"लीजेंड" थे हुज़ूर !!!
इनके नाम पर देश-विदेश में
"पहचान" बनने-बनाने के "बावजूद"
अपनी ही धरा में इन्हें गरियाने वाले हुजूरों !!!
याद रहे कि ....
जो लोग खुद "बना" नहीं सकते,
वे ही "मिटाने" में लग जाते हैं !!!
🔵सृजन कठिन है, विध्वंस आसान !!!
है ना ???
हाँ,,,यह ठीक है कि
"विध्वंस" की ये "कोशिशें" सफल हों या असफल,,,
इतिहास इन्हें याद रखेगा, ज़रूर रखेगा
पर ......
"उस पागल आदमी" की तरह जिसने
माइकल एंजलो की मूर्ति पर हथौड़ा चलाया था !!!
🔵और हाँ,,, हाँ !!!
मुद्दे की बात यह भी कि
"तमाम कोशिश" के बावजूद
"उसका" नाम याद "नहीं" रखा गया है ....
उसे तो रोम में "वो पागल आदमी" ही कहा जाता है !!
याद तो आज भी रोम में
माइकल एंजलो को "ही" किया जाता है हुज़ूर !!!
🛑(गत वर्ष रोम-यात्रा में
जैसा कहीं पढ़ा, सुना....)
मार्बल का भंडार,
माइंस और संगमरमर की फेक्ट्रियों का गढ़ !!!
🛑अक्सर इनके गोदामों के बाहर
बेकार मार्बल का ढेर-
ब्लाक,लफर आदि का दिख जाता है...
तकनीकी तौर पर नाकारा माल !!!
🛑इन्हें आते-जाते जब भी देखता हूं ....
माइकल एंजलो की याद आ जाती है !!!
उनकी विदेशी कहानी सुनाऊँ... रोम की ???
सुन भी लो !!!
🔵माइकल एंजलो ....
संगमरमर की एक दुकान के सामने से अक्सर गुजरते थे. एक दिन उन्होंने दुकानदार से पूछा-
"तुमने दुकान के दूसरी तरफ रास्ते के किनारे
एक बड़ा सा संगमरमर का पत्थर
डाल रखा है...
कई बरस से देख रहा हूं.
उसे बेचते क्यों नहीं ???"
🔵दुकानदार ने कहा-
"वह बिकता ही नहीं !!!
पत्थर बेकार है...
मैंने तो आशा ही छोड़ दी है.
कोई चाहे तो मुफ्त में भी ले जाये !!!
ढोने का खर्च भी मैं दे दूंगा.....
तुम पूछने आये हो तो तुम्हीं ले जाओ ना !
झंझट मिटे और जगह खाली हो !!!!
🔵और ....
माइकल एंजलो वह पत्थर ले गया.
कई साल बीतने के बाद...
एक दिन माइकल एंजलो ने
उसी दुकानदार से आकर पूछा-
"मेरे घर चलोगे??
वहां कुछ दिखाने योग्य है !!!"
🔵दोनों घर गये ...
दुकानदार ने देखा जो देखा तो
आंखों से आनंद के आंसू बह निकले !!!
🔵माइकल एंजलो ने उस पत्थर में
जो प्रतिमा गढ़ी थी,
वह थी जीससऔर मरियम की प्रतिमा !!!
जीसस को मरियम ने सूली से उतारा है,
जीसस की लाश को मरियम
अपने हाथों में लिये बैठी हैं ....
अद्भुत अद्वितीय प्रतिमा !!!!
🔵लोग आने लगे,
देखने लगे,,
सराहने लगे...
प्रतिमा की और माइकल एंजलो की
प्रसिद्धि बढ़ने लगी !!!
🔵और फिर ...
कुछ सालों बाद
एक "पागल आदमी" ने इसी प्रतिमा को
हथौड़ा मारकर तोड़ दिया....
🔵जब उससे पूछा गया--
"यह तूने क्या किया ??
इतनी श्रेष्ठ कृति नष्ट कर दी???"
तो उसने कहा-
"जैसे माइकल एंजलो का नाम प्रसिद्ध था,
अब मेरा भी नाम प्रसिद्ध रहेगा..
उसने बनाई, मैंने मिटाई !!!
वह बना सकता था,
मैं बना नहीं सकता,,
लेकिन मिटा तो सकता हूं!!!"
🔵तो रोम की इस कहानी पर
इन्डिया में सोचिये...
कि
🔵किसी देश के निर्माण के लिए
भूमि, सीमा, सेना,
जनता, सरकार, संस्कृति आदि की जरूरत होती है...
मगर इसके साथ-साथ जरूरत होती है-
नायकों की ....हीरोज की भी !!!
🔵किसी देश के इतिहास, धर्म,
राजनीति और ज्ञान के पुरोधा होते हैं ये नायक !!!
ये होते हैं वो जो ....
अगली पीढ़ियों को गौरवान्वित करते हैं,
राष्ट्र की महानता और उच्चता,
उसके आदर्श में आस्था जगाते हैं...
🔵इन हीरोज़ की छवि, उनका जीवन....
अगली पीढ़ी के नये नागरिकों के मन में
मूरत की तरह बस जाती है !!!
और फिर.....
वे हीरोज़, वे नायक
देश के प्रतीक हो जाते हैं,
व्यक्ति नहीं संस्था हो जाते हैं!!!
इनकी मूरत सिर्फ पत्थरों में ही नहीं होती,
करोड़ों-करोड़ों लोगों के दिलों में होती है !!!
🔵इसलिए....इसलिए
गांधी नेहरू व्यक्ति ही नहीं,
"लीजेंड" थे हुज़ूर !!!
इनके नाम पर देश-विदेश में
"पहचान" बनने-बनाने के "बावजूद"
अपनी ही धरा में इन्हें गरियाने वाले हुजूरों !!!
याद रहे कि ....
जो लोग खुद "बना" नहीं सकते,
वे ही "मिटाने" में लग जाते हैं !!!
🔵सृजन कठिन है, विध्वंस आसान !!!
है ना ???
हाँ,,,यह ठीक है कि
"विध्वंस" की ये "कोशिशें" सफल हों या असफल,,,
इतिहास इन्हें याद रखेगा, ज़रूर रखेगा
पर ......
"उस पागल आदमी" की तरह जिसने
माइकल एंजलो की मूर्ति पर हथौड़ा चलाया था !!!
🔵और हाँ,,, हाँ !!!
मुद्दे की बात यह भी कि
"तमाम कोशिश" के बावजूद
"उसका" नाम याद "नहीं" रखा गया है ....
उसे तो रोम में "वो पागल आदमी" ही कहा जाता है !!
याद तो आज भी रोम में
माइकल एंजलो को "ही" किया जाता है हुज़ूर !!!
🛑(गत वर्ष रोम-यात्रा में
जैसा कहीं पढ़ा, सुना....)
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